The Basic Principles Of Subconscious Mind




ये उसकी यादों का खजाना है, बस लुटाये जा रहा हूँ।

जो लाख कोशिशों के बाद भी लफ़्ज़ों में नहीं सिमट पाती।

Exceptional Adult men and ladies are generally stretching them selves, pushing by themselves out of their ease and comfort zones. They can be pretty informed how speedily the comfort and ease zone, in any place, turns into a rut. They know that complacency is The nice enemy of creativity and upcoming alternatives.

Jun 07, 2010 Amber Tucker marked it regarding-browse Shelves: offered-up-for-now I am actually not sure I will complete this. So far It can be gearing up to generally be 300-odd webpages of, as somebody else right here has pointed out, unsubstantiated "scientific" theories and anecdotal "evidence". I believe in the power in the mind, Absolute confidence whatsoever. But at times I do think new-age types are overcomplicating the enterprise. What enterprise? The organization of THINKING. To inform the truth, I've been into this power-of-the-mind idea for at least 5 or 6 a long time, viewing and Listening to and looking through it fro I am definitely unsure I'll end this.

إذا اعتقدت في قوة الشفاء الكامنة في نوع معين من الماء، ستحصل على النتائج بسبب قوة الافتراض والإيحاء الذي دخل عقلك الباطن

الكتاب ٢٠ فصل في ٢٩٨ صفحة ، يبدأ متدرجاً في ماهو العقل الباطن ، تأثيره ، طريقة تلقينه ، نماذج وقصص متنوعة ، كيف تتغلب على .

यह तीर लक्ष्य पर बैठा, खामोशी की मुहर टूट गयी, बातचीत का सिलसिला क़ायम हुआ। बांध में एक दरार हो जाने की देर थी, फिर तो मन की check here उमंगो ने खुद-ब-खुद काम करना शुरु किया। मैने जैसे-जैसे जाल फैलाये, जैसे-जैसे स्वांग रचे, वह रंगीन तबियत के लोग खूब जानते हैं। और यह सब क्यों? मुहब्बत से नहीं, सिर्फ जरा देर दिल को खुश करने के लिए, सिर्फ उसके भरे-पूरे शरीर और भोलेपन पर रीझकर। यों मैं बहुत नीच प्रकृति का आदमी नहीं हूँ। रूप-रंग में फूलमती का इंदु से मुकाबला न था। वह सुंदरता के सांचे में ढली हुई थी। कवियों ने सौंदर्य की जो कसौटियां बनायी हैं वह सब वहां दिखायी देती थीं लेकिन पता नहीं क्यों मैंने फूलमती की धंसी हुई आंखों और फूले हुए गालों और मोटे-मोटे होठों की तरफ अपने दिल का ज्यादा खिंचाव देखा। आना-जाना बढ़ा और महीना-भर भी गुजरने न पाया कि मैं उसकी मुहब्बत के जाल में पूरी तरह फंस गया। मुझे अब घर की सादा जिंदगी में कोई आनंद न आता था। लेकिन दिल ज्यों-ज्यों घर से उचटता जाता था त्यों-त्यों मैं पत्नी के प्रति प्रेम का प्रदर्शन और भी अधिक करता था। मैं उसकी फ़रमाइशों का इंतजार करता रहता और कभी उसका दिल दुखानेवाली कोई बात मेरी जबान पर न आती। शायद मैं अपनी आंतरिक उदासीनता को शिष्टाचार के पर्दे के पीछे छिपाना चाहता था।

इसलिए आपको याद करते हैं जीने के बहाने से।

كما قال الإمام علي (ع) : الشُكر للإله يدُرُ النعم ْ ويقول الحسَدْ لا يعطي سِوَى الحِرمانْ ، حيث الحسود لايحصل اَبداً على مُبتغاه كَما يرى بِأن عَدَم الصفح إلى من اَساء لَكَ ليس سِوَى سمومٌ يتشربُها الجسد ويُأَكِد بِأنك حينَ تصفَح عن اَحدهم صَفحُك لَه ليس مِنْ اَجلِه بل من اجلَك اَنتْ الحِقد وعدم النسيان يورّث السُقمْ

हजारो अपने है मगर याद सिर्फ वो ही आता है।

وحينما تحدثت مع أحد كبار المدربين المقتنعين بهذا العقل الباطن

الذي يعيب الكتاب هو التكرار المُمل هذا التكرار جعلني آتجاهل الكثير من الصفحات إلى أن وصلت لما بعد المنتصف وتوقفت

मेरी बीवी ने सर झुकाये धीरे से जवाब दिया—क्या जानूं, कोई भिखरिन थी।

وحينما تحدثت مع أحد كبار المدربين المقتنعين بهذا العقل الباطن

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